ब्रह्मा कुमारी पंथ की स्थापना
ब्रम्हाकुमारी पंथ की स्थापना सन 1936 में दादा लेखराज द्वारा हैदराबाद में ओम मंडली के रूप में की गई जिसका संचालक दादा लेखराज को बनाया गया उसके बाद अगले ही वर्ष प्रजापिता ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय की स्थापना की गई 

सन 1950 मैं राजस्थान के सिरोही जिले में आबू पर्वत पर ब्रह्माकुमारी पंथ का आश्रम बना उसके बाद सन् 1969 में दादा लेखराज का निधन हो गया फिर दादी प्रकाशमणि को संस्था का संचालक बनाया गया तथा वर्तमान में मुख्य प्रशासिका के पद पर दादी जानकी कार्यरत है


ब्रम्हाकुमारी पंथ में वर्तमान में गद्दी पर दो बहने बैठती है जो सत्संग प्रवचन देती है ब्रम्हाकुमारी पंथ के अनुयाई कहते हैं कि इन बहनों में ब्रह्मा जी बोलते हैं फिर उनका आदेश रिकॉर्ड कर लिया जाता है तथा किताबों में लिख दिया जाता है 
ब्रम्हाकुमारी पंत वालों का मानना है कि इन किताबों में जो लिखा है यह हमारी तरफ से नहीं है बल्कि भगवान का आदेश है

ब्रम्हाकुमारी पंथ का ज्ञान कितना शास्त्रों से मेल खाता है आइए जानते हैं

ब्रम्हाकुमारी पंथ वालों का मानना है कि गीता जी का ज्ञान शिव जी ने बोला!
जबकि हम आपको पवित्र गीता जी से प्रमाणित करके दिखाएंगे की गीता जी का ज्ञान किसने बोला

पवित्र गीता अध्याय 11 के श्लोक 31 में अर्जुन ने पूछा कि है उग्र रूप वाले आप कौन हो!
फिर अध्याय 11 के श्लोक 32 में गीता ज्ञान दाता ने उत्तर दिया कि मैं काल हूं और सर्व सेना का नाश करने के लिए अब प्रवृत्त हुआ हूं इससे स्पष्ट हुआ कि गीता का ज्ञान काल ने दिया


यदि ब्रम्हाकुमारी पंथ के संचालक और उनके अनुयाई गीता जी को सत्य मानते हैं तो उनको यह श्लोक भी सत्य मानना चाहिए जिसमें स्पष्ट लिखा है कि गीता जी का ज्ञान काल ब्रह्म (ब्रह्मा विष्णु महेश के पिता) ने बोला


ब्रम्हाकुमारी पंथ की अज्ञानता का पर्दाफाश

झूठ नंबर - 1
ब्रम्हाकुमारी पंथ वाले कहते हैं किस श्री कृष्ण जी 16 कला संपूर्ण थे और श्रीराम 14 कला संपूर्ण थे इसलिए कृष्ण जी के बाद आए थे यानी इनका मानना है कि द्वापर पहले और त्रेता बाद में आया था

झूठ नंबर - 2
( प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पांडव भवन आबू पर्वत राजस्थान )इस पुस्तक में लिखा है कि ब्रह्मा विष्णु और शिव के रचयिता ज्योति स्वरूप यानि काल है फिर कहते हैं कि गीता जी का ज्ञान शिव जी ने बोला यानी इनके अनुसार गीता ज्ञान दाता ही सबका परमपिता है और यह खुद भी कहते हैं कि गीता ज्ञान दाता ही सबका परमपिता है
बुद्धिमान समाज विचार करे कि ये अपनी ही पुस्तक में लिखते हैं कि ब्रह्मा विष्णु और शिव जी की उत्पत्ति ज्योति स्वरूप यानि काल ने की और फिर लिखते हैं कि शिवजी ही सबके परमपिता है

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पांडव भवन आबू पर्वत राजस्थान पुस्तक के 143 पृष्ठ पर लिखा है कि गीता ज्ञान दाता यानी शिव ही सबका परमपिता है
जबकि
  18 वें अध्याय के 62 वें श्लोक में गीता ज्ञान दाता अपने से अन्य भगवान की शरण में जाने को बोल रहा है यानी गीता ज्ञानदाता समरन नहीं है


झूठ नंबर - 3
 प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय पांडव भवन आबू पर्वत नामक पुस्तक में लिखा है कि गीता ज्ञान दाता को याद करो जिससे आपकी मुक्ति संभव है

विशेष विवेचन    - यदि ब्रम्हाकुमारी पंथ वाले गीता जी को मानते हैं तो उन्होंने अपनी पुस्तक में यह बात सरासर गलत लिखी है कि गीता ज्ञान दाता को याद करने से मोक्ष मिलेगा क्योंकि पवित्र गीता जी अध्याय 18 के श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता तो स्वयं कहता है कि अर्जुन तू उस परमेश्वर की शरण में जा जिसकी कृपा से तू परम शांति और शाश्वत स्थान अर्थात सतलोक को प्राप्त होगा



#SecretOfGeeta
पवित्र गीता अध्याय 18 के श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता स्वयं कहता है कि अर्जुन तू उस परमेश्वर की शरण में जा जिसकी कृपा से तू परम शांति तथा शास्वत स्थान को प्राप्त होगा
तो इससे स्पष्ट है कि गीता ज्ञान दाता भी नाशवान है

 झूठ नंबर - 4
ब्रम्हाकुमारी पंथ वाले कहते हैं कि गीता ज्ञान दाता ही सबका परमपिता है उसी की साधना करने से मोक्ष मिलेगा
जबकि
पवित्र श्रीमदभगवद गीता अध्याय 15 के श्लोक 17 में गीता ज्ञान दाता अपने से किस अन्य भगवान को उत्तम पुरुष कह है



इसके अलावा
पवित्र गीता अध्याय 18 के श्लोक 64 में गीता ज्ञान दाता (बृह्म) ने बताया है की हे अर्जुन तुझे एक और गोपनीय रहस्य बताता हूं कि वह पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब मेरा भी पूज्य देव (इष्टदेव) है



विचार करें - जब गीता ज्ञान दाता स्वयं कहता है कि मैं भी उसी परमेश्वर की शरण में हूं अर्थात मेरा भी इष्ट देव वही परमात्मा कबीर साहेब है तो ब्रम्हाकुमारी पंथ वालों का ज्ञान शास्त्र विरुद्ध है



पवित्र गीता जी के अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 में कहा है कि शास्त्र विधि को त्याग कर जो मनमाना आचरण करता है उसको किसी भी प्रकार का लाभ प्राप्त नहीं होता और ये ब्रम्हाकुमारी पंथ वाले आज तक शास्त्रविरुद्ध साधनाएं कर और करवा रहे है
अवश्य देखिए👉 साधना टीवी चैनल शाम 7:30 बजे


झूठ नंबर - 5
ब्रम्हाकुमारी पंथ वाले कहते हैं कि परमात्मा निराकार है जबकि हमारे पवित्र शास्त्र कहते हैं कि परमात्मा साकार है

ऋग्वेद मंडल 1 सुक्त 31 मंत्र 17
 तथा सुक्त 86 मंत्र 26, 27 में प्रमाण है कि परमात्मा साकार है
अवश्य देखिए👉 साधना टीवी चैनल रात्रि 7:30 बजे

ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 82 मंत्र 1 में लिखा है कि वह सर्वोत्पादक प्रभु , सृष्टि की रचना करने वाला, पाप कर्मो को हरण करने वाला राजा के समान दर्शनीय है 👉इससे सिद्ध हुआ कि परमात्मा साकार है



झूठ नंबर  - 6
 ब्रम्हाकुमारी पंथ वालों का मानना है कि परमात्मा का नाम शिव है जबकि
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 86 मंत्र 17 18 ,19 और 20 में प्रमाण है कि परमात्मा कबीर साहेब है



झूठ नंबर - 7
ब्रम्हाकुमारी पंथ वाले कहते हैं कि ओम ही सबसे बड़ा और शांति का मंत्र है
 जबकि
पवित्र गीता जी अध्याय 17 के श्लोक 23 में ॐ तत् सत ये तीन मंत्र मोक्ष के बताए हैं



झूठ नंबर - 8
ब्रम्हाकुमारी पंथ का मानना है कि प्रजापति ब्रह्मा लेखराज के शरीर में प्रवेश करके परमात्मा ने ज्ञान बोला
 जबकि
ऋग्वेद मंडल 9 सुक्त 94 श्लोक 4 में लिखा है कि वह परमात्मा अपने भक्तों को ज्ञान देने के लिए सशरीर आता है और सशरीर चला जाता है



झूठ नंबर - 9
ब्रम्हाकुमारी पंथ का मानना है कि भक्ति के लिए गुरु बनाना आवश्यक नहीं
जबकि
महापुरुषों ने गुरु का कितना महत्व बताया है
जिन मुझको निज नाम दिया सोए सतगुरु हमार
 दादू दूसरा कोई नहीं कबीर सिरजनहार

स्वामी रामानंद जी ने भी कहा है कि
दोहु ठोड़ है एक तू भया एक से दो |
गरीबदास हम कारणे तुम आए हो मग जो

बोलत रामानंद जी सुनो कबीर करतार
गरीबदास सब रूप के तुम ही सिरजनहार||

आदरणीय घीसादास जी ने कहा है कि
पानी से पैदा नहीं स्वांसा नहीं शरीर |
अन्न आहार करते नहीं ताका नाम कबीर ||

आदरणीय गरीब दास जी ने कहा है कि
अनंत कोटी ब्रम्हांड में बंदी छोड़ कहाए |
सो तो एक कबीर है जो जननी जने ना माय ||





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